अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि वह जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम करने या उन्हें पूरी तरह वापस बुलाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों को इस संभावित फैसले की भनक तक नहीं थी और उन्हें इसकी जानकारी राष्ट्रपति के सार्वजनिक पोस्ट के जरिए ही मिली।
यह विवाद तब गहराया जब जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने हाल ही में एक बयान में कहा कि ईरान के साथ जारी संघर्ष और बातचीत में अमेरिका 'अपमानित' हो रहा है और उसके पास कोई स्पष्ट 'एग्जिट स्ट्रैटेजी' नहीं है। ट्रंप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जर्मनी को दूसरों के मामलों में दखल देने के बजाय अपने घर की समस्याओं, विशेष रूप से ऊर्जा संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध पर ध्यान देना चाहिए। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने जर्मनी के साथ-साथ स्पेन और इटली से भी सैनिकों को हटाने के संकेत दिए, यह कहते हुए कि ये देश अमेरिका की पर्याप्त मदद नहीं कर रहे हैं।
पेंटागन के लिए ट्रंप का यह रुख बड़ी चुनौती बन गया है। जर्मनी में वर्तमान में लगभग 36,436 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप और अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य अभियानों का मुख्य केंद्र हैं। अधिकारियों का कहना है कि 2020 में भी ट्रंप ने 12,000 सैनिकों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन लॉजिस्टिक बाधाओं और द्विदलीय विरोध के कारण उसे कभी लागू नहीं किया जा सका। हालांकि, इस बार ट्रंप का रुख अधिक कड़ा लग रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका जर्मनी, इटली और स्पेन से पीछे हटता है, तो इससे न केवल नाटो की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी, बल्कि रूस और ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों का दबदबा भी कम हो सकता है।