फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने एक बार फिर अपने बेबाक और विचारोत्तेजक बयान से फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। धुरंधर 2 के प्रभाव के बाद वर्मा ने न सिर्फ फिल्म की जमकर तारीफ की, बल्कि अपने फिल्ममेकिंग अप्रोच में बड़े बदलाव का ऐलान भी किया है। उन्होंने इसे अपने करियर का “रीबर्थ” बताया है।
अपने विस्तृत नोट में वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी अगली फिल्म का नाम सरकार नहीं बल्कि सिंडिकेट क्यों है। उनके मुताबिक सिंडिकेट एक बेहद खौफनाक कॉन्सेप्ट पर आधारित है—एक ऐसा दिन जब भारत की पूरी कानून-व्यवस्था अचानक ढह जाती है। उन्होंने इसे हॉरर जैसा अनुभव बताया, लेकिन बिना किसी अलौकिक तत्व के—यह डर इंसानी व्यवहार की सच्चाई से पैदा होता है। कहानी एक ऐसे शक्तिशाली और संगठित तंत्र के उभरने के इर्द-गिर्द घूमती है, जो देश के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाता है।
वर्मा ने अपने निजी सफर पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि बचपन में वे ऑटो-रिक्शा ड्राइवर बनना चाहते थे, फिर कभी जंगल में रहने का सपना देखा, इंजीनियर बनने की चाह रखी और आखिरकार फिल्ममेकर बन गए। उन्होंने एनिड ब्लाइटन, जेम्स हैडली चेज़ और फ्रेडरिक फॉर्सिथ जैसे लेखकों का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी रचनाओं ने अलग-अलग समय पर उनके सोचने का नजरिया बदला।
उन्होंने अपने सिनेमाई सफर को भी इन प्रेरणाओं से जोड़ा। वर्मा ने बताया कि उनकी शुरुआती फिल्मों पर द साउंड ऑफ म्यूजिक, द एक्सॉर्सिस्ट और द गॉडफादर जैसी क्लासिक फिल्मों का गहरा असर था। इसी प्रेरणा से रंगीला, रात, भूत, सत्या, कंपनी और सरकार जैसी फिल्में बनीं। हालांकि अब उनका मानना है कि धुरंधर 2 ने इन सभी प्रभावों को पीछे छोड़ दिया है और कहानी, किरदार, म्यूजिक, परफॉर्मेंस और एक्शन के स्तर पर एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है।
वर्मा ने धुरंधर 2 को “गॉडफादर का भी गॉडफादर” बताते हुए कहा कि इस फिल्म ने जॉनर की सिनेमाई भाषा को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब उनकी अपनी पिछली फिल्में उन्हें छोटी लगती हैं और समय आ गया है कि पुराने फिल्ममेकिंग आइडियोलॉजी को छोड़ दिया जाए। उन्होंने आदित्य धर और उनकी टीम को इस नए बेंचमार्क के लिए श्रेय दिया और कहा कि पूरी इंडस्ट्री को इस फिल्म का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।
अपने नोट के अंत में वर्मा ने एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बदलते सिनेमाई दौर के साथ खुद को अपडेट न करना फिल्ममेकर्स, राइटर्स और एक्टर्स के लिए “आत्मघाती गलती” साबित हो सकता है। उन्होंने इंडस्ट्री से अपील की कि वे अपना अहंकार छोड़ें, सीखने के लिए तैयार रहें और धुरंधर 2 का गहराई से विश्लेषण करें। वर्मा के अनुसार, 19 मार्च 2026 सिनेमा के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है—एक ऐसा दिन जब पुरानी सोच “बेरहमी से खत्म” हुई और नई कहानी कहने का दौर शुरू हुआ।